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सूरत के संगिनी टेक्सटाइल मार्केट की आग हादसा नहीं, पुलिस के मुताबिक अकाउंटेंट की कथित साजिश; 14 दुकानें जलकर खाक, 38 घंटे में बुझी आग सूरत | मालवांचल मित्र कभी-कभी छोटी सी नाराजगी ऐसा बड़ा रूप ले लेती है कि उसका नुकसान गिनते-गिनते भी आंकड़े कम पड़ जाएं। सूरत के संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में लगी भीषण आग के पीछे पुलिस ने कुछ ऐसा ही मामला सामने आने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, करीब 10 हजार रुपये की बकाया सैलरी को लेकर नाराज एक अकाउंटेंट ने कथित तौर पर पेट्रोल छिड़ककर बाजार में आग लगा दी। देखते ही देखते आग ने 14 दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और करीब 24 करोड़ रुपये का कपड़ा जलकर खाक हो गया। यानी विवाद था 10 हजार रुपये का और नुकसान बताया जा रहा है करोड़ों का। गुस्सा ऐसा कि हिसाब-किताब रखने वाले ने आखिरकार पूरा हिसाब ही आग के हवाले कर दिया। 150 रुपये के पेट्रोल से रची कथित साजिश पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले के रूप में हुई है। वह श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट की दुकान नंबर 639 में अकाउंटेंट के तौर पर काम करता था। उसने अप्रैल 2026 में करीब 30 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी शुरू की थी। कुछ समय बाद उसका दुकान मालिक से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। पुलिस की जांच में सामने आया कि विनोद के करीब 10 हजार रुपये कथित तौर पर बकाया थे। इसी बात को लेकर वह नाराज था। पुलिस के मुताबिक, इसी नाराजगी में उसने बाजार में आग लगाने की योजना बनाई। इसके लिए उसने देवध गांव स्थित एक पेट्रोल पंप से करीब 150 रुपये का पेट्रोल खरीदा।
रात में बाजार बंद होने का किया इंतजार पुलिस के मुताबिक, 8 सितंबर की रात करीब 9 बजे विनोद पेट्रोल लेकर मार्केट पहुंचा। वह प्लास्टिक की थैली और बोतल में पेट्रोल लेकर पांचवीं मंजिल की सीढ़ियों के पास बैठ गया और बाजार पूरी तरह बंद होने का इंतजार करने लगा। जब दुकानें बंद हो गईं और बाजार में सन्नाटा छा गया, तब उसने दुकान के बाहर रखे कपड़े के बॉक्स और पार्सल के आसपास पेट्रोल छिड़का और कथित तौर पर आग लगा दी। इसके बाद वह मौके से निकल गया। आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामान होने के कारण लपटें तेजी से फैलती चली गईं और देखते ही देखते कई दुकानें इसकी चपेट में आ गईं। 1500 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले आग की जांच में पुलिस ने बाजार और आसपास लगे 1500 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसी दौरान पुलिस को एक फुटेज मिली, जिसमें एक व्यक्ति मुंह पर रुमाल बांधे और कंधे पर बैग लटकाए मार्केट में जाता दिखाई दिया। पुलिस के मुताबिक, फुटेज में वह अपने बैग से पेट्रोल की बोतल निकालता और बाहर रखे कपड़े पर पेट्रोल छिड़कने के बाद आग लगाता दिखाई दिया। जांच आगे बढ़ी तो पुलिस का शक विनोद पर गया और उसे आरोपी के तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया। 38 घंटे तक जूझता रहा दमकल विभाग आग इतनी भीषण थी कि उसे बुझाने के लिए दमकल विभाग की कई टीमों को मौके पर लगाया गया। पुलिस के अनुसार, आग पर पूरी तरह काबू पाने में करीब 38 घंटे लगे। तब तक करीब 14 दुकानें आग की चपेट में आ चुकी थीं और लगभग 24 करोड़ रुपये का कपड़ा जलकर राख हो गया। एक तरफ कारोबारी अपने करोड़ों के माल को बचाने की कोशिश कर रहे थे, तो दूसरी तरफ जांच एजेंसियां इस सवाल का जवाब तलाश रही थीं कि आखिर इतनी बड़ी आग लगी कैसे।
आग के बाद परिवार सहित हो गया फरार पुलिस के मुताबिक, घटना के अगले दिन आग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विनोद को अंदेशा हुआ कि वह जांच के घेरे में आ सकता है। इसके बाद उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया और पत्नी व बच्चे के साथ सूरत से निकल गया। पुलिस के अनुसार, वह पहले राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर गया और इसके बाद अयोध्या पहुंचा। इस बीच क्राइम ब्रांच की टीम उसकी तलाश करती रही। बताया गया है कि जब वह वापस सूरत लौटा तो पुलिस को मुखबिर के जरिए उसकी जानकारी मिली। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। 10 हजार के विवाद ने खड़ा कर दिया करोड़ों का सवाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक कथित वेतन विवाद किस हद तक पहुंच गया। अगर पुलिस की जांच और आरोप सही साबित होते हैं, तो महज 10 हजार रुपये के बकाया भुगतान के विवाद ने कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान पहुंचा दिया। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। अदालत में आरोपों की पुष्टि और दोष तय होना अभी बाकी है। कहानी का सबक सीधा है—पैसों का विवाद बातचीत, शिकायत या कानूनी रास्ते से सुलझ सकता है; लेकिन गुस्से में उठाया गया एक गलत कदम सिर्फ जेब नहीं, कई लोगों की जिंदगी और मेहनत भी जला सकता है। |
सूरत के संगिनी टेक्सटाइल मार्केट की आग हादसा नहीं, पुलिस के मुताबिक अकाउंटेंट की कथित साजिश; 14 दुकानें जलकर खाक, 38 घंटे में बुझी आग
सूरत | मालवांचल मित्र
कभी-कभी छोटी सी नाराजगी ऐसा बड़ा रूप ले लेती है कि उसका नुकसान गिनते-गिनते भी आंकड़े कम पड़ जाएं। सूरत के संगिनी टेक्सटाइल मार्केट में लगी भीषण आग के पीछे पुलिस ने कुछ ऐसा ही मामला सामने आने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, करीब 10 हजार रुपये की बकाया सैलरी को लेकर नाराज एक अकाउंटेंट ने कथित तौर पर पेट्रोल छिड़ककर बाजार में आग लगा दी। देखते ही देखते आग ने 14 दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया और करीब 24 करोड़ रुपये का कपड़ा जलकर खाक हो गया।
यानी विवाद था 10 हजार रुपये का और नुकसान बताया जा रहा है करोड़ों का। गुस्सा ऐसा कि हिसाब-किताब रखने वाले ने आखिरकार पूरा हिसाब ही आग के हवाले कर दिया।
150 रुपये के पेट्रोल से रची कथित साजिश
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान 33 वर्षीय विनोद पंडित सावले के रूप में हुई है। वह श्याम संगिनी टेक्सटाइल मार्केट की दुकान नंबर 639 में अकाउंटेंट के तौर पर काम करता था। उसने अप्रैल 2026 में करीब 30 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी शुरू की थी।
कुछ समय बाद उसका दुकान मालिक से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। पुलिस की जांच में सामने आया कि विनोद के करीब 10 हजार रुपये कथित तौर पर बकाया थे। इसी बात को लेकर वह नाराज था।
पुलिस के मुताबिक, इसी नाराजगी में उसने बाजार में आग लगाने की योजना बनाई। इसके लिए उसने देवध गांव स्थित एक पेट्रोल पंप से करीब 150 रुपये का पेट्रोल खरीदा।

रात में बाजार बंद होने का किया इंतजार
पुलिस के मुताबिक, 8 सितंबर की रात करीब 9 बजे विनोद पेट्रोल लेकर मार्केट पहुंचा। वह प्लास्टिक की थैली और बोतल में पेट्रोल लेकर पांचवीं मंजिल की सीढ़ियों के पास बैठ गया और बाजार पूरी तरह बंद होने का इंतजार करने लगा।
जब दुकानें बंद हो गईं और बाजार में सन्नाटा छा गया, तब उसने दुकान के बाहर रखे कपड़े के बॉक्स और पार्सल के आसपास पेट्रोल छिड़का और कथित तौर पर आग लगा दी।
इसके बाद वह मौके से निकल गया।
आग ने कुछ ही देर में विकराल रूप ले लिया। कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामान होने के कारण लपटें तेजी से फैलती चली गईं और देखते ही देखते कई दुकानें इसकी चपेट में आ गईं।
1500 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले
आग की जांच में पुलिस ने बाजार और आसपास लगे 1500 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। इसी दौरान पुलिस को एक फुटेज मिली, जिसमें एक व्यक्ति मुंह पर रुमाल बांधे और कंधे पर बैग लटकाए मार्केट में जाता दिखाई दिया।
पुलिस के मुताबिक, फुटेज में वह अपने बैग से पेट्रोल की बोतल निकालता और बाहर रखे कपड़े पर पेट्रोल छिड़कने के बाद आग लगाता दिखाई दिया।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस का शक विनोद पर गया और उसे आरोपी के तौर पर गिरफ्तार कर लिया गया।
38 घंटे तक जूझता रहा दमकल विभाग
आग इतनी भीषण थी कि उसे बुझाने के लिए दमकल विभाग की कई टीमों को मौके पर लगाया गया। पुलिस के अनुसार, आग पर पूरी तरह काबू पाने में करीब 38 घंटे लगे।
तब तक करीब 14 दुकानें आग की चपेट में आ चुकी थीं और लगभग 24 करोड़ रुपये का कपड़ा जलकर राख हो गया।
एक तरफ कारोबारी अपने करोड़ों के माल को बचाने की कोशिश कर रहे थे, तो दूसरी तरफ जांच एजेंसियां इस सवाल का जवाब तलाश रही थीं कि आखिर इतनी बड़ी आग लगी कैसे।

आग के बाद परिवार सहित हो गया फरार
पुलिस के मुताबिक, घटना के अगले दिन आग का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विनोद को अंदेशा हुआ कि वह जांच के घेरे में आ सकता है। इसके बाद उसने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया और पत्नी व बच्चे के साथ सूरत से निकल गया।
पुलिस के अनुसार, वह पहले राजस्थान के खाटू श्याम मंदिर गया और इसके बाद अयोध्या पहुंचा। इस बीच क्राइम ब्रांच की टीम उसकी तलाश करती रही।
बताया गया है कि जब वह वापस सूरत लौटा तो पुलिस को मुखबिर के जरिए उसकी जानकारी मिली। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
10 हजार के विवाद ने खड़ा कर दिया करोड़ों का सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक कथित वेतन विवाद किस हद तक पहुंच गया। अगर पुलिस की जांच और आरोप सही साबित होते हैं, तो महज 10 हजार रुपये के बकाया भुगतान के विवाद ने कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान पहुंचा दिया।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। अदालत में आरोपों की पुष्टि और दोष तय होना अभी बाकी है।
कहानी का सबक सीधा है—पैसों का विवाद बातचीत, शिकायत या कानूनी रास्ते से सुलझ सकता है; लेकिन गुस्से में उठाया गया एक गलत कदम सिर्फ जेब नहीं, कई लोगों की जिंदगी और मेहनत भी जला सकता है।