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नीमच। शहर के बस स्टैंड के समीप मौजूद महाराणा बंगला स्थित एक कॉम्प्लेक्स मौत के मुहाने पर चल रहा है। यहां बेतरतीब ढंग से खुली पड़ी वायरिंग, टूटी हुई सीलिंग, टपकती छतें, ओपन पड़ी लिफ्ट की खुली वॉल, टॉयलेट का अभाव और 50 से अधिक महिला कर्मचारी व सौ से अधिक व्यापारी सैकड़ो— पुरुष कर्मचारी और प्रतिदिन कॉम्प्लेक्स में आनेजाने वाले लोग है। जिसमे तो कई वकील, डॉक्टर और किसान, व्यापारी सभी प्रकार शामिल है। हैरानी की बात यह है कि इस कॉम्पलेक्स में इतनी खामियां होने के बाद भी नगर पालिका और उसके जिम्मेदार अधिकारी मौन है। बिजली संबंधित शिकायतों का सुधारने के लिए एक महिने का समय दिया गया थाा जो कि अब पूर्ण हो चुका है। अब देखना यह होगा कि यहां की व्यवस्थाओं में सुधार होगा तो आखिरकार कब....! यहां के व्यापारियों और दुकानदारों का कहना है कि, यदि इस कॉम्पलेक्स में कोई भी अनहोनी होती है तो यहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम तक नहीं है, कॉम्पलेक्स पुरी तरह से खण्डहर में तब्दील होता नजर आ रहा है। यहां रात के अंधेरे में यहां रौशनी तक नहीं रहती है, जैसे—जैसे व्यापारी और आफिस के लोग अपने संस्थान को बंद करके निकलते है। वैसें ही यहां अंधेरा राज करने लगता है। आवारा श्वानों और जंगली जानवरों का खतरा यहां बना रहता है। कई बार शिकायतों के बाद भी यहां मौजूद किसी भी समस्या का कोई समाधान आज तक नहीं हुआ है। |
नीमच। शहर के बस स्टैंड के समीप मौजूद महाराणा बंगला स्थित एक कॉम्प्लेक्स मौत के मुहाने पर चल रहा है। यहां बेतरतीब ढंग से खुली पड़ी वायरिंग, टूटी हुई सीलिंग, टपकती छतें, ओपन पड़ी लिफ्ट की खुली वॉल, टॉयलेट का अभाव और 50 से अधिक महिला कर्मचारी व सौ से अधिक व्यापारी सैकड़ो— पुरुष कर्मचारी और प्रतिदिन कॉम्प्लेक्स में आनेजाने वाले लोग है। जिसमे तो कई वकील, डॉक्टर और किसान, व्यापारी सभी प्रकार शामिल है।
हैरानी की बात यह है कि इस कॉम्पलेक्स में इतनी खामियां होने के बाद भी नगर पालिका और उसके जिम्मेदार अधिकारी मौन है। बिजली संबंधित शिकायतों का सुधारने के लिए एक महिने का समय दिया गया थाा जो कि अब पूर्ण हो चुका है। अब देखना यह होगा कि यहां की व्यवस्थाओं में सुधार होगा तो आखिरकार कब....!
यहां के व्यापारियों और दुकानदारों का कहना है कि, यदि इस कॉम्पलेक्स में कोई भी अनहोनी होती है तो यहां सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम तक नहीं है, कॉम्पलेक्स पुरी तरह से खण्डहर में तब्दील होता नजर आ रहा है। यहां रात के अंधेरे में यहां रौशनी तक नहीं रहती है, जैसे—जैसे व्यापारी और आफिस के लोग अपने संस्थान को बंद करके निकलते है। वैसें ही यहां अंधेरा राज करने लगता है। आवारा श्वानों और जंगली जानवरों का खतरा यहां बना रहता है। कई बार शिकायतों के बाद भी यहां मौजूद किसी भी समस्या का कोई समाधान आज तक नहीं हुआ है।