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नीमच/कनावटी | मालवांचल मित्र नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत किसी भी विद्यार्थी के लिए सिर्फ नई किताबें, नई कक्षा और नई उपस्थिति रजिस्टर की कहानी नहीं होती, बल्कि यह एक नए सफर की शुरुआत होती है। इसी भावना के साथ स्थानीय बालकवि बैरागी टीचर एजुकेशन रिसर्च सेंटर में नवागत विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नए छात्र-अध्यापकों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें संस्थान के वातावरण, अनुशासन, शैक्षणिक गतिविधियों और शिक्षक प्रशिक्षण की बारीकियों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. माधुरी चौरसिया, डॉ. प्रशांत शर्मा, डॉ. दिनेश तिवारी एवं हरिश्चंद्र सिंह राठौर ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। अतिथियों के स्वागत में प्रोफेसर पंकज श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने शिक्षक की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि दीया और शिक्षक एक समान होते हैं, जो स्वयं जलकर भी दूसरों के जीवन को रोशन करते हैं। बात छोटी थी, लेकिन शिक्षक बनने जा रहे विद्यार्थियों के लिए संदेश काफी बड़ा था। शिक्षक बनना सिर्फ डिग्री हासिल करना नहीं कार्यक्रम में बीएड की प्राचार्य श्रीमती रिचा सक्सेना ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय के नियमों और अनुशासन का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक देश का निर्माता होता है, इसलिए शिक्षक प्रशिक्षण के दौरान हर छोटी-बड़ी बारीकी को सीखना जरूरी है। उन्होंने माइक्रो टीचिंग और लेसन प्लान जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को अनिवार्य बताया। डीएड की प्राचार्य डॉ. दुर्गा चौहान ने नवागत विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं ग्रुप डायरेक्टर डॉ. प्रशांत शर्मा ने नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए संस्थान की विशेषताओं और संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. माधुरी चौरसिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल अपने विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उनके भविष्य को दिशा देने का काम करता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यही विद्यार्थी शिक्षक बनकर देश की नई पीढ़ी को तैयार करेंगे। इसलिए नियमित रूप से महाविद्यालय आना, अनुभवी शिक्षकों से सीखना और प्रशिक्षण की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करना बेहद जरूरी है।
तिलक और पुष्पगुच्छ से हुआ स्वागत कार्यक्रम के दौरान संस्थान के प्राध्यापकों और वरिष्ठ विद्यार्थियों ने नवागत विद्यार्थियों का तिलक लगाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। नए विद्यार्थियों के चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दिया। पहली मुलाकात की झिझक भी धीरे-धीरे कम हुई और संस्थान का माहौल औपचारिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर आत्मीय परिचय जैसा बन गया। अनुशासन और शिक्षण कौशल पर जोर इंडक्शन प्रोग्राम में विद्यार्थियों को कॉलेज की नियमावली, उपस्थिति के मानक, परीक्षा पैटर्न और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कर डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और प्रभावी शिक्षक तैयार करना है। माइक्रो टीचिंग, लेसन प्लान, कक्षा संचालन और विद्यार्थियों के साथ संवाद जैसे विषयों को शिक्षक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। साफ संदेश यही रहा कि कक्षा में सिर्फ विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, उसे विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी आना चाहिए। खेलों के जरिए प्रतिभाओं की पहचान कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में नवागत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न गेम्स और गतिविधियों का आयोजन किया गया। कल्पना चौरसिया एवं सुनीता गोयल ने अलग-अलग खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा और सहभागिता को सामने लाने का प्रयास किया। इससे विद्यार्थियों को एक-दूसरे से परिचित होने और अपनी झिझक दूर करने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर पंकज तिवारी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन दीपा सिंह ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, बालकवि बैरागी टीचर एजुकेशन रिसर्च सेंटर का यह इंडक्शन प्रोग्राम नए विद्यार्थियों के लिए स्वागत समारोह से कहीं अधिक रहा। उन्हें यह समझाने की कोशिश की गई कि शिक्षक बनना सिर्फ एक पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी को समझना है। क्योंकि किताबें तो बहुत लोग पढ़ लेते हैं, लेकिन एक अच्छा शिक्षक वही बनता है जो अपने ज्ञान से किसी और का भविष्य बेहतर कर सके। |
नीमच/कनावटी | मालवांचल मित्र
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत किसी भी विद्यार्थी के लिए सिर्फ नई किताबें, नई कक्षा और नई उपस्थिति रजिस्टर की कहानी नहीं होती, बल्कि यह एक नए सफर की शुरुआत होती है। इसी भावना के साथ स्थानीय बालकवि बैरागी टीचर एजुकेशन रिसर्च सेंटर में नवागत विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नए छात्र-अध्यापकों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें संस्थान के वातावरण, अनुशासन, शैक्षणिक गतिविधियों और शिक्षक प्रशिक्षण की बारीकियों से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. माधुरी चौरसिया, डॉ. प्रशांत शर्मा, डॉ. दिनेश तिवारी एवं हरिश्चंद्र सिंह राठौर ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। अतिथियों के स्वागत में प्रोफेसर पंकज श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने शिक्षक की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि दीया और शिक्षक एक समान होते हैं, जो स्वयं जलकर भी दूसरों के जीवन को रोशन करते हैं। बात छोटी थी, लेकिन शिक्षक बनने जा रहे विद्यार्थियों के लिए संदेश काफी बड़ा था।
शिक्षक बनना सिर्फ डिग्री हासिल करना नहीं
कार्यक्रम में बीएड की प्राचार्य श्रीमती रिचा सक्सेना ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय के नियमों और अनुशासन का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक देश का निर्माता होता है, इसलिए शिक्षक प्रशिक्षण के दौरान हर छोटी-बड़ी बारीकी को सीखना जरूरी है। उन्होंने माइक्रो टीचिंग और लेसन प्लान जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति को अनिवार्य बताया।
डीएड की प्राचार्य डॉ. दुर्गा चौहान ने नवागत विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
वहीं ग्रुप डायरेक्टर डॉ. प्रशांत शर्मा ने नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए संस्थान की विशेषताओं और संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के दौरान उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. माधुरी चौरसिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल अपने विद्यार्थियों को विषय का ज्ञान नहीं देता, बल्कि उनके भविष्य को दिशा देने का काम करता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यही विद्यार्थी शिक्षक बनकर देश की नई पीढ़ी को तैयार करेंगे। इसलिए नियमित रूप से महाविद्यालय आना, अनुभवी शिक्षकों से सीखना और प्रशिक्षण की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करना बेहद जरूरी है।

तिलक और पुष्पगुच्छ से हुआ स्वागत
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के प्राध्यापकों और वरिष्ठ विद्यार्थियों ने नवागत विद्यार्थियों का तिलक लगाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। नए विद्यार्थियों के चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दिया। पहली मुलाकात की झिझक भी धीरे-धीरे कम हुई और संस्थान का माहौल औपचारिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर आत्मीय परिचय जैसा बन गया।
अनुशासन और शिक्षण कौशल पर जोर
इंडक्शन प्रोग्राम में विद्यार्थियों को कॉलेज की नियमावली, उपस्थिति के मानक, परीक्षा पैटर्न और विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल परीक्षा पास कर डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और प्रभावी शिक्षक तैयार करना है।
माइक्रो टीचिंग, लेसन प्लान, कक्षा संचालन और विद्यार्थियों के साथ संवाद जैसे विषयों को शिक्षक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। साफ संदेश यही रहा कि कक्षा में सिर्फ विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, उसे विद्यार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी आना चाहिए।
खेलों के जरिए प्रतिभाओं की पहचान
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में नवागत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न गेम्स और गतिविधियों का आयोजन किया गया। कल्पना चौरसिया एवं सुनीता गोयल ने अलग-अलग खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों की प्रतिभा और सहभागिता को सामने लाने का प्रयास किया। इससे विद्यार्थियों को एक-दूसरे से परिचित होने और अपनी झिझक दूर करने का अवसर भी मिला।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर पंकज तिवारी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन दीपा सिंह ने किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कुल मिलाकर, बालकवि बैरागी टीचर एजुकेशन रिसर्च सेंटर का यह इंडक्शन प्रोग्राम नए विद्यार्थियों के लिए स्वागत समारोह से कहीं अधिक रहा। उन्हें यह समझाने की कोशिश की गई कि शिक्षक बनना सिर्फ एक पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी को समझना है। क्योंकि किताबें तो बहुत लोग पढ़ लेते हैं, लेकिन एक अच्छा शिक्षक वही बनता है जो अपने ज्ञान से किसी और का भविष्य बेहतर कर सके।