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नीमच/सुवाखेड़ा। मालवांचल मित्र कॉलेज की शुरुआत अक्सर किताबों, नए चेहरों और थोड़ी-सी घबराहट के साथ होती है। लेकिन जब शुरुआत फार्मेसी जैसे जिम्मेदारी वाले क्षेत्र की हो, तो कहानी सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहती। कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला ज्ञानोदय इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, नीमच में, जहां नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत के लिए Students Induction Programme का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नए विद्यार्थियों का स्वागत तो हुआ ही, साथ ही उन्हें यह भी समझाया गया कि फार्मेसी की पढ़ाई सिर्फ परीक्षा पास करने और डिग्री हासिल करने का रास्ता नहीं है। यहां से निकलने के बाद उनके कंधों पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी जिम्मेदारी भी होगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संस्थान की कुलाधिपति डॉ. माधुरी चौरसिया, विशिष्ट अतिथि कुलपति डॉ. डी.एल. अहिर और ग्रुप डायरेक्टर डॉ. प्रशांत शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के प्राचार्य डॉ. मंगल सिंह पंवार ने की। दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।
प्राचार्य ने कहा—डिग्री से आगे भी बहुत कुछ है प्राचार्य डॉ. मंगल सिंह पंवार ने विद्यार्थियों का ज्ञानोदय परिवार में स्वागत करते हुए कहा कि फार्मेसी केवल डिग्री लेने का माध्यम नहीं है। यह मानव स्वास्थ्य और समाज की सेवा से जुड़ा जिम्मेदारी भरा profession है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, समय प्रबंधन और practical knowledge पर ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही कहा कि कॉलेज के चार साल सिर्फ परीक्षाओं और अंकों के पीछे भागने में नहीं निकलने चाहिए। उनके संदेश का सार साफ था—अच्छे अंक जरूरी हैं, लेकिन research, innovation और skills के बिना तस्वीर अधूरी है। डॉ. माधुरी चौरसिया ने दिखाया भविष्य का रास्ता कुलाधिपति डॉ. माधुरी चौरसिया ने विद्यार्थियों से कहा कि कॉलेज जीवन भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण समय होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को स्पष्ट लक्ष्य में बदलने और लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि फार्मेसी का क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। Research, pharmaceutical industry, clinical pharmacy, entrepreneurship और healthcare sector में विद्यार्थियों के सामने कई अवसर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी ज्ञान के साथ मानवीय संवेदनाएं, नैतिक मूल्य और जिम्मेदारी भी विद्यार्थी के व्यक्तित्व का हिस्सा होने चाहिए। यानी मामला सिर्फ यह नहीं कि कौन-सी दवा कैसे बनेगी, बल्कि यह भी कि उसे बनाने वाला इंसान कितना जिम्मेदार होगा।
कुलपति डॉ. डी.एल. अहिर बोले—किताब बंद करके दुनिया नहीं रुकती कुलपति डॉ. डी.एल. अहिर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने communication skills, practical skills, technology और research aptitude विकसित करने पर जोर दिया। विद्यार्थियों से कहा कि संस्थान में उपलब्ध शैक्षणिक एवं प्रयोगशाला सुविधाओं का भरपूर उपयोग करें, सवाल पूछें, जिज्ञासु बनें और लगातार नई चीजें सीखते रहें। उनका संदेश सीधा था—सीखने की प्रक्रिया की कोई अंतिम तारीख नहीं होती। डॉ. प्रशांत शर्मा ने दिया Innovation का मंत्र ग्रुप डायरेक्टर डॉ. प्रशांत शर्मा ने विद्यार्थियों को फार्मेसी के बदलते स्वरूप से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी का भविष्य सिर्फ पारंपरिक दवा निर्माण तक सीमित नहीं है। नई दवाओं की खोज, drug delivery systems, biotechnology, research और entrepreneurship जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि चार साल की शैक्षणिक यात्रा को केवल डिग्री हासिल करने की दौड़ न बनाएं। यह समय अपनी skills, personality और professional identity को मजबूत करने का है। उन्होंने विद्यार्थियों को कुछ नया सीखने और समाज के लिए उपयोगी innovation करने के लिए प्रेरित किया।
और फिर सामने आई ‘Pharma Futurum’ कार्यक्रम की सबसे खास उपलब्धियों में से एक रही संस्थान की पहली मैगज़ीन ‘Pharma Futurum’ का विमोचन। पहली मैगज़ीन का निकलना किसी भी संस्थान के लिए सिर्फ एक प्रकाशन नहीं होता। यह इस बात का संकेत भी है कि संस्थान में पढ़ाई के साथ लेखन, शोध, रचनात्मकता और विचारों को भी जगह दी जा रही है। ‘Pharma Futurum’ में फार्मेसी और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अकादमिक विषयों के साथ विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्तियों और संस्थान की विभिन्न गतिविधियों को स्थान दिया गया है। अतिथियों ने मैगज़ीन के प्रथम अंक के प्रकाशन पर संस्थान को बधाई दी और इसे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, लेखन कौशल तथा शोध की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। सांस्कृतिक गतिविधियों ने बढ़ाया उत्साह कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। शुरुआत में जो विद्यार्थी शायद एक-दूसरे को नाम से भी नहीं जानते थे, कार्यक्रम आगे बढ़ने के साथ उसी माहौल में घुलते-मिलते नजर आए। यही किसी भी induction programme की असली सफलता मानी जा सकती है—नए चेहरे धीरे-धीरे नए साथियों में बदल जाएं। आभार के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. वैभव वर्मा ने अतिथियों, प्राचार्य, शिक्षकगण, स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. अर्जुन परमार ने किया। कुल मिलाकर ज्ञानोदय इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी का यह Students Induction Programme नए विद्यार्थियों के लिए सिर्फ स्वागत समारोह नहीं रहा। यह उन्हें यह समझाने की कोशिश भी रहा कि आने वाले चार साल केवल किताबों और परीक्षाओं के नहीं, बल्कि सीखने, प्रयोग करने, सवाल पूछने, शोध करने और खुद को एक जिम्मेदार professional के रूप में तैयार करने के हैं। और संस्थान की पहली मैगज़ीन ‘Pharma Futurum’ ने इस नई यात्रा की शुरुआत को एक यादगार पहचान भी दे दी—क्योंकि भविष्य की फार्मेसी सिर्फ दवाइयों की नहीं, नए विचारों की भी कहानी लिखेगी। |
नीमच/सुवाखेड़ा। मालवांचल मित्र
कॉलेज की शुरुआत अक्सर किताबों, नए चेहरों और थोड़ी-सी घबराहट के साथ होती है। लेकिन जब शुरुआत फार्मेसी जैसे जिम्मेदारी वाले क्षेत्र की हो, तो कहानी सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहती। कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिला ज्ञानोदय इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, नीमच में, जहां नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत के लिए Students Induction Programme का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में नए विद्यार्थियों का स्वागत तो हुआ ही, साथ ही उन्हें यह भी समझाया गया कि फार्मेसी की पढ़ाई सिर्फ परीक्षा पास करने और डिग्री हासिल करने का रास्ता नहीं है। यहां से निकलने के बाद उनके कंधों पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी एक बड़ी जिम्मेदारी भी होगी।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संस्थान की कुलाधिपति डॉ. माधुरी चौरसिया, विशिष्ट अतिथि कुलपति डॉ. डी.एल. अहिर और ग्रुप डायरेक्टर डॉ. प्रशांत शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के प्राचार्य डॉ. मंगल सिंह पंवार ने की। दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया।

प्राचार्य ने कहा—डिग्री से आगे भी बहुत कुछ है
प्राचार्य डॉ. मंगल सिंह पंवार ने विद्यार्थियों का ज्ञानोदय परिवार में स्वागत करते हुए कहा कि फार्मेसी केवल डिग्री लेने का माध्यम नहीं है। यह मानव स्वास्थ्य और समाज की सेवा से जुड़ा जिम्मेदारी भरा profession है।
उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, अनुशासन, समय प्रबंधन और practical knowledge पर ध्यान देने की सलाह दी। साथ ही कहा कि कॉलेज के चार साल सिर्फ परीक्षाओं और अंकों के पीछे भागने में नहीं निकलने चाहिए।
उनके संदेश का सार साफ था—अच्छे अंक जरूरी हैं, लेकिन research, innovation और skills के बिना तस्वीर अधूरी है।
डॉ. माधुरी चौरसिया ने दिखाया भविष्य का रास्ता
कुलाधिपति डॉ. माधुरी चौरसिया ने विद्यार्थियों से कहा कि कॉलेज जीवन भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण समय होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को स्पष्ट लक्ष्य में बदलने और लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि फार्मेसी का क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। Research, pharmaceutical industry, clinical pharmacy, entrepreneurship और healthcare sector में विद्यार्थियों के सामने कई अवसर हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी ज्ञान के साथ मानवीय संवेदनाएं, नैतिक मूल्य और जिम्मेदारी भी विद्यार्थी के व्यक्तित्व का हिस्सा होने चाहिए।
यानी मामला सिर्फ यह नहीं कि कौन-सी दवा कैसे बनेगी, बल्कि यह भी कि उसे बनाने वाला इंसान कितना जिम्मेदार होगा।

कुलपति डॉ. डी.एल. अहिर बोले—किताब बंद करके दुनिया नहीं रुकती
कुलपति डॉ. डी.एल. अहिर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने communication skills, practical skills, technology और research aptitude विकसित करने पर जोर दिया। विद्यार्थियों से कहा कि संस्थान में उपलब्ध शैक्षणिक एवं प्रयोगशाला सुविधाओं का भरपूर उपयोग करें, सवाल पूछें, जिज्ञासु बनें और लगातार नई चीजें सीखते रहें।
उनका संदेश सीधा था—सीखने की प्रक्रिया की कोई अंतिम तारीख नहीं होती।
डॉ. प्रशांत शर्मा ने दिया Innovation का मंत्र
ग्रुप डायरेक्टर डॉ. प्रशांत शर्मा ने विद्यार्थियों को फार्मेसी के बदलते स्वरूप से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि फार्मेसी का भविष्य सिर्फ पारंपरिक दवा निर्माण तक सीमित नहीं है।
नई दवाओं की खोज, drug delivery systems, biotechnology, research और entrepreneurship जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि चार साल की शैक्षणिक यात्रा को केवल डिग्री हासिल करने की दौड़ न बनाएं। यह समय अपनी skills, personality और professional identity को मजबूत करने का है।
उन्होंने विद्यार्थियों को कुछ नया सीखने और समाज के लिए उपयोगी innovation करने के लिए प्रेरित किया।

और फिर सामने आई ‘Pharma Futurum’
कार्यक्रम की सबसे खास उपलब्धियों में से एक रही संस्थान की पहली मैगज़ीन ‘Pharma Futurum’ का विमोचन।
पहली मैगज़ीन का निकलना किसी भी संस्थान के लिए सिर्फ एक प्रकाशन नहीं होता। यह इस बात का संकेत भी है कि संस्थान में पढ़ाई के साथ लेखन, शोध, रचनात्मकता और विचारों को भी जगह दी जा रही है।
‘Pharma Futurum’ में फार्मेसी और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अकादमिक विषयों के साथ विद्यार्थियों की रचनात्मक अभिव्यक्तियों और संस्थान की विभिन्न गतिविधियों को स्थान दिया गया है।
अतिथियों ने मैगज़ीन के प्रथम अंक के प्रकाशन पर संस्थान को बधाई दी और इसे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, लेखन कौशल तथा शोध की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
सांस्कृतिक गतिविधियों ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं। नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
शुरुआत में जो विद्यार्थी शायद एक-दूसरे को नाम से भी नहीं जानते थे, कार्यक्रम आगे बढ़ने के साथ उसी माहौल में घुलते-मिलते नजर आए। यही किसी भी induction programme की असली सफलता मानी जा सकती है—नए चेहरे धीरे-धीरे नए साथियों में बदल जाएं।
आभार के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. वैभव वर्मा ने अतिथियों, प्राचार्य, शिक्षकगण, स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. अर्जुन परमार ने किया।
कुल मिलाकर ज्ञानोदय इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी का यह Students Induction Programme नए विद्यार्थियों के लिए सिर्फ स्वागत समारोह नहीं रहा। यह उन्हें यह समझाने की कोशिश भी रहा कि आने वाले चार साल केवल किताबों और परीक्षाओं के नहीं, बल्कि सीखने, प्रयोग करने, सवाल पूछने, शोध करने और खुद को एक जिम्मेदार professional के रूप में तैयार करने के हैं।
और संस्थान की पहली मैगज़ीन ‘Pharma Futurum’ ने इस नई यात्रा की शुरुआत को एक यादगार पहचान भी दे दी—क्योंकि भविष्य की फार्मेसी सिर्फ दवाइयों की नहीं, नए विचारों की भी कहानी लिखेगी।