![]() ![]() ![]() ![]() ![]()
|
















|
मालवांचल मित्र, (रमेशचन्द्र चन्द्रे): देश में शासन की समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से होता है। ऐसे में उनकी कार्यशैली, व्यवहार और सार्वजनिक छवि समाज पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि कोई अधिकारी सरकारी योजनाओं की जानकारी देने अथवा जनकल्याण के उद्देश्य से वीडियो या रील बनाता है, तो वह सराहनीय हो सकता है। किंतु जब रीलें व्यक्तिगत लोकप्रियता, प्रशंसा या सोशल मीडिया प्रसिद्धि प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई जाने लगती हैं, तब यह स्थिति प्रशासनिक गरिमा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। आज सोशल मीडिया का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है। कई प्रशासनिक अधिकारी, विशेषकर महिला अधिकारी, व्यक्तिगत जीवनशैली अथवा आकर्षक प्रस्तुतियों पर आधारित रीलें बनाकर प्रसारित कर रही हैं। भले ही उनका उद्देश्य सकारात्मक हो, लेकिन समाज का एक वर्ग इसे अलग दृष्टि से देखने लगता है। सोशल मीडिया पर होने वाले भद्दे कमेंट, व्यक्तिगत टिप्पणियां और चरित्र पर सवाल महिला अधिकारियों के लिए मानसिक दबाव का कारण बनते हैं। इससे अन्य महिला अधिकारी भी हतोत्साहित होती हैं।
प्रशासनिक पद केवल आकर्षक व्यक्तित्व या लोकप्रियता के लिए नहीं होता। यह जिम्मेदारी, अनुशासन और नेतृत्व का पद है। जनता अधिकारी में गंभीरता, निष्पक्षता और कार्यक्षमता देखना चाहती है। जब कोई अधिकारी कैमरे और सोशल मीडिया पर अत्यधिक केंद्रित दिखाई देता है, तब लोगों को यह महसूस होने लगता है कि अधिकारी अपने मूल कर्तव्यों से अधिक प्रचार पर ध्यान दे रहा है। कई बार जनता यह मान लेती है कि रील बनाने वाला अधिकारी जमीन से जुड़ा हुआ है और भारतीय संस्कृति को समझता है, किंतु दूसरी ओर यह धारणा भी बनती है कि ऐसे अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र की वास्तविक समस्याओं से दूर होकर कैमरे की दुनिया में अधिक व्यस्त हैं। इसका परिणाम यह होता है कि लोग उनकी प्रशासनिक कमजोरियों को पहचानने लगते हैं और अधिकारी स्वयं भी अपने मूल उद्देश्य से भटक सकते हैं।
आईएएस, आईपीएस सहित सभी प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि उन्हें यह पद उनकी योग्यता, मेहनत और क्षमता के आधार पर प्राप्त हुआ है, न कि सुंदरता या सोशल मीडिया लोकप्रियता के कारण। प्रशासनिक अधिकारी समाज, कर्मचारियों और युवाओं के लिए रोल मॉडल होते हैं। इसलिए उन्हें अपनी गरिमा और पद की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। यदि कैमरे में आने की महत्वाकांक्षा अत्यधिक बढ़ जाए, तो व्यक्ति अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक सकता है। यह न तो अधिकारी के लिए हितकारी है और न ही सरकार एवं समाज के लिए। सरकार भी सामान्यतः उन्हीं अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपती है, जिनकी छवि गंभीर, कार्यकुशल और संतुलित होती है।
अतः प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रील संस्कृति से बचते हुए अपने कर्तव्यों, जनसेवा और प्रशासनिक दक्षता पर अधिक ध्यान देना चाहिए। यही उनकी वास्तविक पहचान और सम्मान का आधार होना चाहिए। — रमेशचन्द्र चन्द्रे |
मालवांचल मित्र, (रमेशचन्द्र चन्द्रे): देश में शासन की समस्त योजनाओं का क्रियान्वयन प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से होता है। ऐसे में उनकी कार्यशैली, व्यवहार और सार्वजनिक छवि समाज पर गहरा प्रभाव डालती है। यदि कोई अधिकारी सरकारी योजनाओं की जानकारी देने अथवा जनकल्याण के उद्देश्य से वीडियो या रील बनाता है, तो वह सराहनीय हो सकता है। किंतु जब रीलें व्यक्तिगत लोकप्रियता, प्रशंसा या सोशल मीडिया प्रसिद्धि प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई जाने लगती हैं, तब यह स्थिति प्रशासनिक गरिमा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
आज सोशल मीडिया का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है। कई प्रशासनिक अधिकारी, विशेषकर महिला अधिकारी, व्यक्तिगत जीवनशैली अथवा आकर्षक प्रस्तुतियों पर आधारित रीलें बनाकर प्रसारित कर रही हैं। भले ही उनका उद्देश्य सकारात्मक हो, लेकिन समाज का एक वर्ग इसे अलग दृष्टि से देखने लगता है। सोशल मीडिया पर होने वाले भद्दे कमेंट, व्यक्तिगत टिप्पणियां और चरित्र पर सवाल महिला अधिकारियों के लिए मानसिक दबाव का कारण बनते हैं। इससे अन्य महिला अधिकारी भी हतोत्साहित होती हैं।

प्रशासनिक पद केवल आकर्षक व्यक्तित्व या लोकप्रियता के लिए नहीं होता। यह जिम्मेदारी, अनुशासन और नेतृत्व का पद है। जनता अधिकारी में गंभीरता, निष्पक्षता और कार्यक्षमता देखना चाहती है। जब कोई अधिकारी कैमरे और सोशल मीडिया पर अत्यधिक केंद्रित दिखाई देता है, तब लोगों को यह महसूस होने लगता है कि अधिकारी अपने मूल कर्तव्यों से अधिक प्रचार पर ध्यान दे रहा है।
कई बार जनता यह मान लेती है कि रील बनाने वाला अधिकारी जमीन से जुड़ा हुआ है और भारतीय संस्कृति को समझता है, किंतु दूसरी ओर यह धारणा भी बनती है कि ऐसे अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र की वास्तविक समस्याओं से दूर होकर कैमरे की दुनिया में अधिक व्यस्त हैं। इसका परिणाम यह होता है कि लोग उनकी प्रशासनिक कमजोरियों को पहचानने लगते हैं और अधिकारी स्वयं भी अपने मूल उद्देश्य से भटक सकते हैं।

आईएएस, आईपीएस सहित सभी प्रशासनिक अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि उन्हें यह पद उनकी योग्यता, मेहनत और क्षमता के आधार पर प्राप्त हुआ है, न कि सुंदरता या सोशल मीडिया लोकप्रियता के कारण। प्रशासनिक अधिकारी समाज, कर्मचारियों और युवाओं के लिए रोल मॉडल होते हैं। इसलिए उन्हें अपनी गरिमा और पद की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।
यदि कैमरे में आने की महत्वाकांक्षा अत्यधिक बढ़ जाए, तो व्यक्ति अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक सकता है। यह न तो अधिकारी के लिए हितकारी है और न ही सरकार एवं समाज के लिए। सरकार भी सामान्यतः उन्हीं अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपती है, जिनकी छवि गंभीर, कार्यकुशल और संतुलित होती है।

अतः प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रील संस्कृति से बचते हुए अपने कर्तव्यों, जनसेवा और प्रशासनिक दक्षता पर अधिक ध्यान देना चाहिए। यही उनकी वास्तविक पहचान और सम्मान का आधार होना चाहिए।
— रमेशचन्द्र चन्द्रे