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मालवांचल मित्र, नीमच। नीमच के पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने जिले के शासकीय चिकित्सालयों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला चिकित्सालय सहित जिले के विभिन्न पीएचसी, सीएचसी और 30 बिस्तरीय शासकीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त फायर सेफ्टी सिस्टम उपलब्ध नहीं है। डॉ. जाजू ने कहा कि नीमच जिले में जिला चिकित्सालय के अलावा जीरन, बोरदिया कला, पालसोड़ा, जावद, सरवानिया, डिकेन, रतनगढ़, सिंगोली, मनासा, कुकड़ेश्वर, रामपुरा सहित कई नगर पंचायतों एवं बड़े ग्रामों में शासकीय अस्पताल संचालित हैं, जहां मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जाता है। उनका आरोप है कि अधिकांश अस्पतालों में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम है और न ही पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि आग लगने की स्थिति में जिले में मुख्य रूप से नीमच नगरपालिका, अल्कोलाइड फैक्ट्री और सीमेंट फैक्ट्री की फायर ब्रिगेड सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय पर राहत कार्य प्रभावित हो सकता है। डॉ. जाजू ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अस्पतालों का निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। निरीक्षण के बाद मीडिया के माध्यम से व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देते। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में नीमच जिला चिकित्सालय में फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित करने की योजना को प्रदेश सरकार ने स्वीकृति देकर कार्यादेश जारी किया था तथा निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण किया जाना था। उनका आरोप है कि जुलाई 2026 तक भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका, जिसका खामियाजा मरीजों और आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
डॉ. जाजू ने कहा कि वर्ष 2023 से जुलाई 2026 के बीच जिला चिकित्सालय का कई बार निरीक्षण किया गया और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश देने के दावे किए गए। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से यह सार्वजनिक करने की मांग की कि फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर कब-कब निरीक्षण किया गया, कौन-कौन से निर्देश दिए गए, उनका कितना पालन हुआ और यदि पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि अस्पतालों के निरीक्षण और निर्देशों की प्रक्रिया वर्षों से चल रही है, लेकिन उसका अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया है। उन्होंने जिले के सभी शासकीय चिकित्सालयों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराने, कमियों को दूर करने तथा मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। |
मालवांचल मित्र, नीमच। नीमच के पूर्व विधायक डॉ. सम्पत स्वरूप जाजू ने जिले के शासकीय चिकित्सालयों में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला चिकित्सालय सहित जिले के विभिन्न पीएचसी, सीएचसी और 30 बिस्तरीय शासकीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त फायर सेफ्टी सिस्टम उपलब्ध नहीं है।
डॉ. जाजू ने कहा कि नीमच जिले में जिला चिकित्सालय के अलावा जीरन, बोरदिया कला, पालसोड़ा, जावद, सरवानिया, डिकेन, रतनगढ़, सिंगोली, मनासा, कुकड़ेश्वर, रामपुरा सहित कई नगर पंचायतों एवं बड़े ग्रामों में शासकीय अस्पताल संचालित हैं, जहां मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जाता है। उनका आरोप है कि अधिकांश अस्पतालों में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए न तो आधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम है और न ही पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि आग लगने की स्थिति में जिले में मुख्य रूप से नीमच नगरपालिका, अल्कोलाइड फैक्ट्री और सीमेंट फैक्ट्री की फायर ब्रिगेड सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय पर राहत कार्य प्रभावित हो सकता है।
डॉ. जाजू ने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अस्पतालों का निरीक्षण केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। निरीक्षण के बाद मीडिया के माध्यम से व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देते।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में नीमच जिला चिकित्सालय में फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित करने की योजना को प्रदेश सरकार ने स्वीकृति देकर कार्यादेश जारी किया था तथा निर्धारित समय सीमा में कार्य पूर्ण किया जाना था। उनका आरोप है कि जुलाई 2026 तक भी यह कार्य पूरा नहीं हो सका, जिसका खामियाजा मरीजों और आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

डॉ. जाजू ने कहा कि वर्ष 2023 से जुलाई 2026 के बीच जिला चिकित्सालय का कई बार निरीक्षण किया गया और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश देने के दावे किए गए। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से यह सार्वजनिक करने की मांग की कि फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर कब-कब निरीक्षण किया गया, कौन-कौन से निर्देश दिए गए, उनका कितना पालन हुआ और यदि पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि अस्पतालों के निरीक्षण और निर्देशों की प्रक्रिया वर्षों से चल रही है, लेकिन उसका अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आया है। उन्होंने जिले के सभी शासकीय चिकित्सालयों का व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराने, कमियों को दूर करने तथा मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।