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झारड़ा / पालसोडा। आरबीएस महाविद्यालय के फार्मेसी विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा झारड़ा एवं पालसोडा में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत एक नुक्कड़ नाटक का सफल आयोजन किया गया। इस नाटक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' (AMR) यानी दवाओं के प्रति जीवाणुओं में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता के खतरों के प्रति जागरूक करना था। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना खतरनाक छात्रों ने अपने अभिनय के माध्यम से दिखाया कि कैसे लोग अक्सर मामूली सर्दी, जुकाम या बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक (Antibiotics) दवाएं खरीदकर खाने लगते हैं। इसके अलावा, बीमारी के थोड़े लक्षण ठीक होते ही दवाओं का कोर्स अधूरा छोड़ देना भी एक बड़ी भूल है।फार्मेसी छात्रों ने ग्रामीणों को सरल भाषा में समझाया कि एंटीबायोटिक्स का गलत या अत्यधिक इस्तेमाल करने से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया (जीवाणु) इन दवाओं के आदी हो जाते हैं। भविष्य में जब कोई गंभीर बीमारी होती है, तो ये दवाएं शरीर पर असर करना पूरी तरह बंद कर देती हैं, जिसे 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' कहा जाता है। छात्रों का संदेश व अपील: डॉक्टर की पर्ची के बिना दवा न लें: केवल पंजीकृत डॉक्टर (Registered Medical Practitioner) की सलाह पर ही एंटीबायोटिक लें। दवा का कोर्स पूरा करें: अगर डॉक्टर ने 5 दिन की दवा लिखी है, तो पूरी खुराक लें, भले ही आप 2 दिन में ठीक महसूस करने लगें। अपनी दवा दूसरों को न दें: एक व्यक्ति की दवा दूसरे के लिए हानिकारक हो सकती है। सफाई का ध्यान रखें: हाथ धोने और स्वच्छता बनाए रखने से संक्रमण का खतरा कम होता है, जिससे दवाओं की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। ग्रामीणों ने की सराहना- झारड़ा एवं पालसोडा के ग्रामीणों ने छात्रों के इस प्रयास की सराहना की और नाटक को काफी रोचक व ज्ञानवर्धक बताया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने ग्रामीणों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए और उन्हें स्वस्थ व जागरूक रहने का संकल्प दिलाया |
झारड़ा / पालसोडा। आरबीएस महाविद्यालय के फार्मेसी विभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा झारड़ा एवं पालसोडा में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत एक नुक्कड़ नाटक का सफल आयोजन किया गया। इस नाटक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' (AMR) यानी दवाओं के प्रति जीवाणुओं में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता के खतरों के प्रति जागरूक करना था।
बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेना खतरनाक
छात्रों ने अपने अभिनय के माध्यम से दिखाया कि कैसे लोग अक्सर मामूली सर्दी, जुकाम या बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक (Antibiotics) दवाएं खरीदकर खाने लगते हैं। इसके अलावा, बीमारी के थोड़े लक्षण ठीक होते ही दवाओं का कोर्स अधूरा छोड़ देना भी एक बड़ी भूल है।फार्मेसी छात्रों ने ग्रामीणों को सरल भाषा में समझाया कि एंटीबायोटिक्स का गलत या अत्यधिक इस्तेमाल करने से शरीर में मौजूद बैक्टीरिया (जीवाणु) इन दवाओं के आदी हो जाते हैं। भविष्य में जब कोई गंभीर बीमारी होती है, तो ये दवाएं शरीर पर असर करना पूरी तरह बंद कर देती हैं, जिसे 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' कहा जाता है।
छात्रों का संदेश व अपील:
डॉक्टर की पर्ची के बिना दवा न लें: केवल पंजीकृत डॉक्टर (Registered Medical Practitioner) की सलाह पर ही एंटीबायोटिक लें।
दवा का कोर्स पूरा करें: अगर डॉक्टर ने 5 दिन की दवा लिखी है, तो पूरी खुराक लें, भले ही आप 2 दिन में ठीक महसूस करने लगें।
अपनी दवा दूसरों को न दें: एक व्यक्ति की दवा दूसरे के लिए हानिकारक हो सकती है।
सफाई का ध्यान रखें: हाथ धोने और स्वच्छता बनाए रखने से संक्रमण का खतरा कम होता है, जिससे दवाओं की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
ग्रामीणों ने की सराहना-
झारड़ा एवं पालसोडा के ग्रामीणों ने छात्रों के इस प्रयास की सराहना की और नाटक को काफी रोचक व ज्ञानवर्धक बताया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों ने ग्रामीणों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए और उन्हें स्वस्थ व जागरूक रहने का संकल्प दिलाया