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नीमच। संगीत स्वर और ताल का एक ऐसा सुन्दर संगम हैं जो मन को शान्ति और जीवन को खुशियों से भर देता हैं। संगीत आत्मा की भाषा हैं, संगीत ईश्वर का उपहार है जो जीवन को सार्थक, मधुर एवं तनाव मुक्त बनता हैं यह केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं वरन मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत जरुरी हैं । यह हमारे मन को शांति, खुशी और नई ऊर्जा प्रदान करता हैं । यू तो संगीत गायन वादन और नृत्य का अनूठा संगम हैं । लेकिन गायन-वादन कलां अधिक प्रचलित हैं । घरों में, खेतों में, अपने कार्यस्थलों में लोग गुनगुनाते हैं तो ऐसा लगता है मानो फूल खिलखिला रहे हैं और यही संगीत को लोकप्रिय बनाता हैं। संगीत की बात हो और हार्मनी का जिक्र ना हो यह तो असंभव हैं । नीमच में 36 वर्ष पूर्व हार्मनी संस्था अपने अस्तित्व में आई जो पूर्णतया संगीत के लिए समर्पित रही । इसे गुरवचन नरवले, रवि शर्मा, भूपेंद्र भारद्वाज, कमलेश कंडारा और कुछ अन्य लोगो ने मिलकर निर्मित की थी बाद में इसका कारवां बढ़ता चला गया । मुकेश भट्नागर, जम्बू कुमार जैन जैसे कुछ नामों ने इसकी कीर्ति पताका फ़हराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी । पिछले 36 सालों में हार्मनी संगीत प्रेमियों के दिल पर राज कर रही हैं और प्रतिवर्ष एक से एक मधुर गीतों का गुलदस्ता लेकर अपने अस्तित्व का अहसास कराती रही हैं। जब ताल से उठे दिल की खता कोई, इन्ही विचारों के मद्देनजर 36 वर्षों से हार्मनी संगीत एवं कला संस्था द्वारा नीमच के संगीत प्रेमी श्रोताओं के लिए बेहतरीन संगीत निशा का आयोजन होता आया है । इसी क्रम में इस वर्ष में राठौर परिसर में दिनांक 3 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर भव्य सांस्कृतिक संगीत निशा का आयोजन किया गया । 36 वें वर्ष आयोजित हार्मनी का संगीत कार्यक्रम बेहद सफल और शानदार रहा । हार्मनी के मंच पर एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियां देखने और सुनने को मिली । हर आवाज में मिठास हर गीत में जज्बात और हर प्रस्तुति में एक अलग ही ऊर्जा नजर आ रही थी । सभी गायकों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से पूरी महफ़िल में चार चांद लगा दिए । हार्मनी के मंच पर हर आवाज श्रोताओं को मंत्र मुग्ध करती हुई नजर आई । शानदार और मनमोहन संगीत कार्यक्रम में सुर ताल और भावनाओं का खूबसूरत संगम देखने को मिला । सभी कलाकारों ने अपनी मधुर आवाज और शानदार अंदाज से महफिल में समा बांध दिया ऐसा लगा जैसे संगीत ने पूरे माहौल को खुशियों और ऊर्जा से भर दिया है । संगतकारो की संगत ने महफिल में चार-चार लगा दिए । और बैक स्टेज पर बच्चों का पार्श्व गायन काबिले तारीफ था। हर एक इंस्ट्रूमेंट प्ले करने वाले व्यक्ति ने अपनी बेहतरीन कला का प्रदर्शन किया फिर चाहे वह सिंथेसाइजर हो, गिटार हो, ऑक्टोपैड हो, जॉर्ज ड्रम हो या अन्य कोई इंस्ट्रूमेंट सभी ने बेहतरीन कला का प्रदर्शन कर पूरी महफिल को संगीतमय बना दिया। किसी ने सही कहा हैं संगीत वो दरवाज़ा हैं जिसके पार मन, हर बोझ उतारकर हल्का हो जाता हैं । कभी-कभी हम शब्दों में नहीं कह पाते पर एक छोटी सी धुन हमारी पूरी उलझन पढ़ लेती हैं । कार्यक्रम के प्रारंभ में सुरेश जी एवं गुलशन कान्हा ने *“सूरज की गर्मी से तपते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया” गीत प्रस्तुत कर संगीत को ईश्वर की अराधना से जोड़ा। कार्यक्रम प्रस्तुति की अगली कड़ी में अपने सनम की बेवफाई को अंकित करता हुआ लाजवाब गीत “बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन याद करता हैं ” प्रस्तुत कर संगीत शिक्षिका डॉ. अमृता सोनी ने समां बाँध दिया । अपने आँखों में हजारों सुहाने सपने लेकर एक मदमस्त नगमा “चला जाता हूँ किसी की धुन में” गाकर अनिल जैन ने सभी को आनंदित कर दिया । वहीं दूसरी और अपने पगले दीवाने दिल का हाल सुनाया राजश्री जायसवाल ने “दिल दीवाना बिन सजना के माने ना” गीत के माध्यम से । उसके बाद आये मुस्तफा जिन्होंने “यह जो चिलमन हैं दुश्मन हैं हमारी” गीत लेकर । अगले ही पल वातावरण के बदलते हुए सूरज नैनवाया आये और उन्होंने हाई नोट पर “तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही” गीत से पूरे सदन को आंदोलित कर दिया मानो दिल का सारा दर्द उंडेल कर रख दिया हो । इसके बाद शिवा मित्तल आई और उन्होंने संगीत की फिजाओं में मदमस्त कर देने वाला एक नगमा “फ़ज़ा भी है जवाँ जवाँ” अपनी मखमली आवाज में गाया। हार्मनी के आधार स्तम्भ भूपेंद्र भारद्वाज ने “जिसका कोई नहीं उसका खुदा हैं यारों” गीत गाया और यह साबित कर दिया अच्छा गाना सिर्फ सुर लगाने से नहीं दिल लगाकर गाने से बनता हैं । कंडारा परिवार को नीमच में कौन नहीं जानता यह परिवार संगीत के लिए जीता हैं, संगीत के लिए मरता हैं । उसी परिवार की प्यारी बिटिया निष्ठा कंडारा ने “सिलसिला यह चाहत का” क्लासिकल बेस्ड सोंग गाकर सभी श्रोताओं में संगीत की दुनिया में खो जाने के लिए मजबूर कर दिया । निष्ठा का एक और नगमा “पान खाके सईंया हमारे” लोक गीत ने वातावरण में मस्ती भर दी । हर्षदा एक बहुत ही मस्ती भरी गायिका हैं जिन्होंने “हंगामा हो गया” गीत गाकर राठौर परिसर को पार्टी स्थल में बदल दिया। इस गीत को संगत कलाकारों ने बहुत ही खूबसूरती के साथ निभाया जिससे वातावरण का उल्लास अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया। सुरों की सटीक समझ और लय का पूर्ण ज्ञान रखने वाले सुरीले गायक जम्बू कुमार जैन ने हर्षदा के साथ जुगलबंदी कर “दीवाना हुआ बादल” गीत के माध्यम से अपनी छाप छोड़ दी वहीँ “राम तेरी गंगा मैली” गीत को अपने सुरों के माध्यम से समाज में हो रहे बदलाव को रेखांकित किया। कार्यक्रम के सूत्रधार रवि शर्मा ने संगीता नागदे के साथ “दिल तेरा दीवाना” गीत सुनाकर साबित कर दिया संगीत आत्मा में समां जाए तो वह कभी नहीं मरता। रवि का एक सोलो सोंग “मुझे रात दिन दिल को रास आया” भी लोगों ने बहुत पसंद किया। वहीँ संगीता का गीत “सुन साहिबा सुन” ने काश्मीर की खुबसूरत वादियों में रूहानी, सुकून और सौंधी खुशबु की याद दिला दी। “रंगीलो म्हारो ढोलना” भारतीय संगीत जगत का एक बेहद लोकप्रिय और सदाबहार लोकगीत हैं जो देश के हर फंक्शन में गाया जाता है और वातावरण को उत्साह और उमंग से भर देता हैं। प्रियंका शर्मा ने इसे गाकर यह साबित कर दिया कि उनकी आवाज प्रख्यात गायिका शुभा मुद्गल जी की तरह शक्तिशाली और बुलंद हैं । हमारे देश के गीतकारों का जवाब नहीं किसी को इस अंदाज में प्रपोज़ किया जाता हैं “प्यार माँगा हैं तुम्हीं से” गीत को बहुत ही खूबसूरती के साथ निभाया चंद्रशेखर योगी ने। राधिका काबरा ने मन को मोह लेनी वाली आवाज के साथ जादू बिखेरा। मेड इन इंडिया गीत के माध्यम से और पूरे विश्व की सैर करवा दी। कुछ गाने इतने लाजवाब होते है जो हर श्रोता की पसंद होते हैं। “एक चतुर नार करके श्रृंगार” गीत उन्हीं में से एक हैं, कमलेश कंडारा और भूपेंद्र भारद्वाज दोनों की जुगलबंदी ने इस अनोखी शैली, हास्य एवं शास्त्रीय संगीत के बेहतरीन मिश्रण को बखूबी से गाया जिसका श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। डॉ. पंकज सोनी ने “तेरे चेहरे में वो जादू हैं” अपनी मधुर आवाज से सदाबहार रोमांटिक गीत गाकर माहौल को खुशनुमा और रंगीला बना दिया। आशी अरोड़ा एक अच्छी और उभरती कलाकार हैं कुछ गायकों को दो-दो बार मौका मिला लेकिन उनको आखिरी में गवाया गया उन्हें बीच में स्थान मिलना चाहिए था। बावजूद इसके आशी अरोड़ा ने “तू क्या जाने वफ़ा” गीत को बड़े ही जोशीले अंदाज में गाया एवं लोगों की तालियाँ बटोरी। किसी भी कार्यक्रम में संचालक की भूमिका का बहुत ही महत्व होता हैं। संचालिका के भरपूर प्रयत्न के बाद भी वे अपनी छाप नहीं छोड़ पायी। भाषा में उतार-चढ़ाव की कमी थी, सीधे सपाट शब्दों में किये गए उनके संचालन को उन्हें बेहतर बनाना चाहिए। मुकेश जी भटनागर बहुत याद आये। कुल मिलाकर हार्मनी की बहुप्रतीक्षित संगीत निशा के गायक एवं संगत कलाकारों ने कार्यक्रम को भव्य बनाया और यह साबित कर दिया कि संगीत मन का वह दीपक हैं जो अँधेरे में रोशनी दे जाता हैं, निराशा में आशा का संचार कर देता हैं। |
नीमच। संगीत स्वर और ताल का एक ऐसा सुन्दर संगम हैं जो मन को शान्ति और जीवन को खुशियों से भर देता हैं। संगीत आत्मा की भाषा हैं, संगीत ईश्वर का उपहार है जो जीवन को सार्थक, मधुर एवं तनाव मुक्त बनता हैं यह केवल मनोरंजन का साधन ही नहीं वरन मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी बहुत जरुरी हैं । यह हमारे मन को शांति, खुशी और नई ऊर्जा प्रदान करता हैं । यू तो संगीत गायन वादन और नृत्य का अनूठा संगम हैं । लेकिन गायन-वादन कलां अधिक प्रचलित हैं । घरों में, खेतों में, अपने कार्यस्थलों में लोग गुनगुनाते हैं तो ऐसा लगता है मानो फूल खिलखिला रहे हैं और यही संगीत को लोकप्रिय बनाता हैं।
संगीत की बात हो और हार्मनी का जिक्र ना हो यह तो असंभव हैं । नीमच में 36 वर्ष पूर्व हार्मनी संस्था अपने अस्तित्व में आई जो पूर्णतया संगीत के लिए समर्पित रही । इसे गुरवचन नरवले, रवि शर्मा, भूपेंद्र भारद्वाज, कमलेश कंडारा और कुछ अन्य लोगो ने मिलकर निर्मित की थी बाद में इसका कारवां बढ़ता चला गया । मुकेश भट्नागर, जम्बू कुमार जैन जैसे कुछ नामों ने इसकी कीर्ति पताका फ़हराने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी । पिछले 36 सालों में हार्मनी संगीत प्रेमियों के दिल पर राज कर रही हैं और प्रतिवर्ष एक से एक मधुर गीतों का गुलदस्ता लेकर अपने अस्तित्व का अहसास कराती रही हैं।
जब ताल से उठे दिल की खता कोई,
धीमें से यादों को सहला जाता है जब गीत कोई,
साथ-साथ गुनगुनाते हैं दिल क्योंकि,
संगीत दिलों का उत्सव हैं ।
हमारे आपके सम्मिलित सुरों का महोत्सव हैं ।
इन्ही विचारों के मद्देनजर 36 वर्षों से हार्मनी संगीत एवं कला संस्था द्वारा नीमच के संगीत प्रेमी श्रोताओं के लिए बेहतरीन संगीत निशा का आयोजन होता आया है । इसी क्रम में इस वर्ष में राठौर परिसर में दिनांक 3 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर भव्य सांस्कृतिक संगीत निशा का आयोजन किया गया । 36 वें वर्ष आयोजित हार्मनी का संगीत कार्यक्रम बेहद सफल और शानदार रहा । हार्मनी के मंच पर एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुतियां देखने और सुनने को मिली । हर आवाज में मिठास हर गीत में जज्बात और हर प्रस्तुति में एक अलग ही ऊर्जा नजर आ रही थी । सभी गायकों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति से पूरी महफ़िल में चार चांद लगा दिए । हार्मनी के मंच पर हर आवाज श्रोताओं को मंत्र मुग्ध करती हुई नजर आई । शानदार और मनमोहन संगीत कार्यक्रम में सुर ताल और भावनाओं का खूबसूरत संगम देखने को मिला । सभी कलाकारों ने अपनी मधुर आवाज और शानदार अंदाज से महफिल में समा बांध दिया ऐसा लगा जैसे संगीत ने पूरे माहौल को खुशियों और ऊर्जा से भर दिया है ।
संगतकारो की संगत ने महफिल में चार-चार लगा दिए । और बैक स्टेज पर बच्चों का पार्श्व गायन काबिले तारीफ था। हर एक इंस्ट्रूमेंट प्ले करने वाले व्यक्ति ने अपनी बेहतरीन कला का प्रदर्शन किया फिर चाहे वह सिंथेसाइजर हो, गिटार हो, ऑक्टोपैड हो, जॉर्ज ड्रम हो या अन्य कोई इंस्ट्रूमेंट सभी ने बेहतरीन कला का प्रदर्शन कर पूरी महफिल को संगीतमय बना दिया। किसी ने सही कहा हैं संगीत वो दरवाज़ा हैं जिसके पार मन, हर बोझ उतारकर हल्का हो जाता हैं । कभी-कभी हम शब्दों में नहीं कह पाते पर एक छोटी सी धुन हमारी पूरी उलझन पढ़ लेती हैं ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सुरेश जी एवं गुलशन कान्हा ने *“सूरज की गर्मी से तपते हुए तन को मिल जाए तरुवर की छाया” गीत प्रस्तुत कर संगीत को ईश्वर की अराधना से जोड़ा। कार्यक्रम प्रस्तुति की अगली कड़ी में अपने सनम की बेवफाई को अंकित करता हुआ लाजवाब गीत “बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन याद करता हैं ” प्रस्तुत कर संगीत शिक्षिका डॉ. अमृता सोनी ने समां बाँध दिया । अपने आँखों में हजारों सुहाने सपने लेकर एक मदमस्त नगमा “चला जाता हूँ किसी की धुन में” गाकर अनिल जैन ने सभी को आनंदित कर दिया । वहीं दूसरी और अपने पगले दीवाने दिल का हाल सुनाया राजश्री जायसवाल ने “दिल दीवाना बिन सजना के माने ना” गीत के माध्यम से । उसके बाद आये मुस्तफा जिन्होंने “यह जो चिलमन हैं दुश्मन हैं हमारी” गीत लेकर ।
अगले ही पल वातावरण के बदलते हुए सूरज नैनवाया आये और उन्होंने हाई नोट पर “तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही” गीत से पूरे सदन को आंदोलित कर दिया मानो दिल का सारा दर्द उंडेल कर रख दिया हो । इसके बाद शिवा मित्तल आई और उन्होंने संगीत की फिजाओं में मदमस्त कर देने वाला एक नगमा “फ़ज़ा भी है जवाँ जवाँ” अपनी मखमली आवाज में गाया। हार्मनी के आधार स्तम्भ भूपेंद्र भारद्वाज ने “जिसका कोई नहीं उसका खुदा हैं यारों” गीत गाया और यह साबित कर दिया अच्छा गाना सिर्फ सुर लगाने से नहीं दिल लगाकर गाने से बनता हैं ।
कंडारा परिवार को नीमच में कौन नहीं जानता यह परिवार संगीत के लिए जीता हैं, संगीत के लिए मरता हैं । उसी परिवार की प्यारी बिटिया निष्ठा कंडारा ने “सिलसिला यह चाहत का” क्लासिकल बेस्ड सोंग गाकर सभी श्रोताओं में संगीत की दुनिया में खो जाने के लिए मजबूर कर दिया । निष्ठा का एक और नगमा “पान खाके सईंया हमारे” लोक गीत ने वातावरण में मस्ती भर दी ।
हर्षदा एक बहुत ही मस्ती भरी गायिका हैं जिन्होंने “हंगामा हो गया” गीत गाकर राठौर परिसर को पार्टी स्थल में बदल दिया। इस गीत को संगत कलाकारों ने बहुत ही खूबसूरती के साथ निभाया जिससे वातावरण का उल्लास अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया। सुरों की सटीक समझ और लय का पूर्ण ज्ञान रखने वाले सुरीले गायक जम्बू कुमार जैन ने हर्षदा के साथ जुगलबंदी कर “दीवाना हुआ बादल” गीत के माध्यम से अपनी छाप छोड़ दी वहीँ “राम तेरी गंगा मैली” गीत को अपने सुरों के माध्यम से समाज में हो रहे बदलाव को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के सूत्रधार रवि शर्मा ने संगीता नागदे के साथ “दिल तेरा दीवाना” गीत सुनाकर साबित कर दिया संगीत आत्मा में समां जाए तो वह कभी नहीं मरता। रवि का एक सोलो सोंग “मुझे रात दिन दिल को रास आया” भी लोगों ने बहुत पसंद किया। वहीँ संगीता का गीत “सुन साहिबा सुन” ने काश्मीर की खुबसूरत वादियों में रूहानी, सुकून और सौंधी खुशबु की याद दिला दी।
“रंगीलो म्हारो ढोलना” भारतीय संगीत जगत का एक बेहद लोकप्रिय और सदाबहार लोकगीत हैं जो देश के हर फंक्शन में गाया जाता है और वातावरण को उत्साह और उमंग से भर देता हैं। प्रियंका शर्मा ने इसे गाकर यह साबित कर दिया कि उनकी आवाज प्रख्यात गायिका शुभा मुद्गल जी की तरह शक्तिशाली और बुलंद हैं । हमारे देश के गीतकारों का जवाब नहीं किसी को इस अंदाज में प्रपोज़ किया जाता हैं “प्यार माँगा हैं तुम्हीं से” गीत को बहुत ही खूबसूरती के साथ निभाया चंद्रशेखर योगी ने। राधिका काबरा ने मन को मोह लेनी वाली आवाज के साथ जादू बिखेरा। मेड इन इंडिया गीत के माध्यम से और पूरे विश्व की सैर करवा दी।
कुछ गाने इतने लाजवाब होते है जो हर श्रोता की पसंद होते हैं। “एक चतुर नार करके श्रृंगार” गीत उन्हीं में से एक हैं, कमलेश कंडारा और भूपेंद्र भारद्वाज दोनों की जुगलबंदी ने इस अनोखी शैली, हास्य एवं शास्त्रीय संगीत के बेहतरीन मिश्रण को बखूबी से गाया जिसका श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। डॉ. पंकज सोनी ने “तेरे चेहरे में वो जादू हैं” अपनी मधुर आवाज से सदाबहार रोमांटिक गीत गाकर माहौल को खुशनुमा और रंगीला बना दिया। आशी अरोड़ा एक अच्छी और उभरती कलाकार हैं कुछ गायकों को दो-दो बार मौका मिला लेकिन उनको आखिरी में गवाया गया उन्हें बीच में स्थान मिलना चाहिए था। बावजूद इसके आशी अरोड़ा ने “तू क्या जाने वफ़ा” गीत को बड़े ही जोशीले अंदाज में गाया एवं लोगों की तालियाँ बटोरी।
किसी भी कार्यक्रम में संचालक की भूमिका का बहुत ही महत्व होता हैं। संचालिका के भरपूर प्रयत्न के बाद भी वे अपनी छाप नहीं छोड़ पायी। भाषा में उतार-चढ़ाव की कमी थी, सीधे सपाट शब्दों में किये गए उनके संचालन को उन्हें बेहतर बनाना चाहिए। मुकेश जी भटनागर बहुत याद आये। कुल मिलाकर हार्मनी की बहुप्रतीक्षित संगीत निशा के गायक एवं संगत कलाकारों ने कार्यक्रम को भव्य बनाया और यह साबित कर दिया कि संगीत मन का वह दीपक हैं जो अँधेरे में रोशनी दे जाता हैं, निराशा में आशा का संचार कर देता हैं।