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नीमच। 2026-27 की अफीम नीति जारी नहीं होने से मालवा-मेवाड़ के काश्तकार असमंजस में हैं। खेत तैयार हैं, लेकिन किसान यह तय नहीं कर पा रहे कि कितने रकबे में अफीम बोनी है। पिछले साल 16 सितंबर को नीति जारी हो गई थी, इस बार अक्टूबर में भी इंतजार है। नीति में देरी से बोवनी और फसल पर असर की आशंका के बीच किसानों के इस मुद्दे पर क्षेत्रीय सांसदों की चुप्पी और पट्टा वितरण में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यह सवाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मालवा और मेवाड़ अंचल के लाखों अफीम काश्तकारों का भविष्य नीति की घोषणा में हो रही देरी से प्रभावित हो रहा है। किसानों को यह पता नहीं है कि इस बार उन्हें कितने रकबे में अफीम की खेती करनी है। ऐसे में खेत तैयार होने के बावजूद बोवनी को लेकर निर्णय नहीं हो पा रहा है। बोवनी में देरी का फसल पर असर- श्री बाहेती ने कहा कि अफीम की फसल के लिए समय पर बोवनी बेहद जरूरी है। इसमें देरी होने पर बाद में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड और मौसम में अचानक बदलाव का असर पौधों की वृद्धि, डोडों और अफीम के रस की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इससे किसानों की उपज और आय प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इस बार क्षेत्र में बारिश कम होने के कारण खेतों की नमी तेजी से घट रही है और मिट्टी कड़क होती जा रही है। किसान अफीम के पट्टे की उम्मीद में खेत खाली रखे हुए हैं। यदि वे वैकल्पिक फसल बो देते हैं और बाद में अफीम का पट्टा जारी होता है तो वे अफीम की खेती से वंचित रह सकते हैं। इस स्थिति ने काश्तकारों की परेशानी बढ़ा दी है। सांसदों की चुप्पी पर सवाल- तरूण बाहेती ने मंदसौर-नीमच सांसद सुधीर गुप्ता और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लाखों काश्तकारों से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर सांसदों को केंद्र सरकार और नारकोटिक्स विभाग के सामने किसानों का पक्ष रखना चाहिए। जनता ने उन्हें किसानों की आवाज उठाने के लिए चुना है, लेकिन नीति में देरी के बावजूद प्रभावी हस्तक्षेप दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 16 सितंबर को नीति जारी हो गई थी, जबकि इस बार अक्टूबर का पहला सप्ताह बीतने के बाद भी नीति सामने नहीं आई है। इससे किसानों में पट्टों की तारीख, पात्रता, नियम और रकबे को लेकर असमंजस बना हुआ है। पट्टा वितरण में पारदर्शिता की मांग- श्री बाहेती ने नारकोटिक्स विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नीति में देरी और पात्र किसानों की सूची सार्वजनिक नहीं होने से बिचौलियों के सक्रिय होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पट्टा दिलाने के नाम पर किसानों से सौदेबाजी की शिकायतें सामने आती हैं। श्री बाहेती ने बताया कि वे पूर्व में उप नारकोटिक्स आयुक्त (डीएनसी) से मिलकर मांग कर चुके हैं कि नीति जारी होते ही इस वर्ष पट्टा पाने वाले पात्र किसानों की पूरी सूची विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि जब शासन के अन्य विभागों में पात्र लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाती है तो अफीम पट्टों के मामले में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। पुराने पट्टे बहाल करने की मांग- जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने वर्ष 1990 और 1995 से मामूली तकनीकी कारणों अथवा विसंगतियों के चलते पट्टे गंवा चुके गरीब काश्तकारों के पट्टे तत्काल बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पट्टा वितरण प्रक्रिया को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि पात्र किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। नीति तत्काल जारी करने की मांग- श्री बाहेती ने केंद्र सरकार से 2026-27 की अफीम नीति तत्काल घोषित करने, नीति जारी होते ही पात्र काश्तकारों की सूची वेबसाइट पर सार्वजनिक करने और पुराने कटे पट्टे बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वे खेत और बोवनी को लेकर सही निर्णय ले सकें। मांग नहीं मानी तो नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव- जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री बाहेती ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द नीति जारी नहीं की, पात्र किसानों की सूची सार्वजनिक नहीं की और किसानों की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस अफीम काश्तकारों के साथ नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव करेगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस किसानों के साथ आंदोलन को और व्यापक करेगी। |
नीमच। 2026-27 की अफीम नीति जारी नहीं होने से मालवा-मेवाड़ के काश्तकार असमंजस में हैं। खेत तैयार हैं, लेकिन किसान यह तय नहीं कर पा रहे कि कितने रकबे में अफीम बोनी है। पिछले साल 16 सितंबर को नीति जारी हो गई थी, इस बार अक्टूबर में भी इंतजार है। नीति में देरी से बोवनी और फसल पर असर की आशंका के बीच किसानों के इस मुद्दे पर क्षेत्रीय सांसदों की चुप्पी और पट्टा वितरण में पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह सवाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष तरुण बाहेती ने उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मालवा और मेवाड़ अंचल के लाखों अफीम काश्तकारों का भविष्य नीति की घोषणा में हो रही देरी से प्रभावित हो रहा है। किसानों को यह पता नहीं है कि इस बार उन्हें कितने रकबे में अफीम की खेती करनी है। ऐसे में खेत तैयार होने के बावजूद बोवनी को लेकर निर्णय नहीं हो पा रहा है।
बोवनी में देरी का फसल पर असर-
श्री बाहेती ने कहा कि अफीम की फसल के लिए समय पर बोवनी बेहद जरूरी है। इसमें देरी होने पर बाद में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड और मौसम में अचानक बदलाव का असर पौधों की वृद्धि, डोडों और अफीम के रस की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इससे किसानों की उपज और आय प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इस बार क्षेत्र में बारिश कम होने के कारण खेतों की नमी तेजी से घट रही है और मिट्टी कड़क होती जा रही है। किसान अफीम के पट्टे की उम्मीद में खेत खाली रखे हुए हैं। यदि वे वैकल्पिक फसल बो देते हैं और बाद में अफीम का पट्टा जारी होता है तो वे अफीम की खेती से वंचित रह सकते हैं। इस स्थिति ने काश्तकारों की परेशानी बढ़ा दी है।
सांसदों की चुप्पी पर सवाल-
तरूण बाहेती ने मंदसौर-नीमच सांसद सुधीर गुप्ता और चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लाखों काश्तकारों से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर सांसदों को केंद्र सरकार और नारकोटिक्स विभाग के सामने किसानों का पक्ष रखना चाहिए। जनता ने उन्हें किसानों की आवाज उठाने के लिए चुना है, लेकिन नीति में देरी के बावजूद प्रभावी हस्तक्षेप दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 16 सितंबर को नीति जारी हो गई थी, जबकि इस बार अक्टूबर का पहला सप्ताह बीतने के बाद भी नीति सामने नहीं आई है। इससे किसानों में पट्टों की तारीख, पात्रता, नियम और रकबे को लेकर असमंजस बना हुआ है।
पट्टा वितरण में पारदर्शिता की मांग-
श्री बाहेती ने नारकोटिक्स विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नीति में देरी और पात्र किसानों की सूची सार्वजनिक नहीं होने से बिचौलियों के सक्रिय होने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पट्टा दिलाने के नाम पर किसानों से सौदेबाजी की शिकायतें सामने आती हैं। श्री बाहेती ने बताया कि वे पूर्व में उप नारकोटिक्स आयुक्त (डीएनसी) से मिलकर मांग कर चुके हैं कि नीति जारी होते ही इस वर्ष पट्टा पाने वाले पात्र किसानों की पूरी सूची विभाग की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए। उन्होंने कहा कि जब शासन के अन्य विभागों में पात्र लाभार्थियों की सूची सार्वजनिक की जाती है तो अफीम पट्टों के मामले में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।
पुराने पट्टे बहाल करने की मांग-
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने वर्ष 1990 और 1995 से मामूली तकनीकी कारणों अथवा विसंगतियों के चलते पट्टे गंवा चुके गरीब काश्तकारों के पट्टे तत्काल बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पट्टा वितरण प्रक्रिया को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि पात्र किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
नीति तत्काल जारी करने की मांग-
श्री बाहेती ने केंद्र सरकार से 2026-27 की अफीम नीति तत्काल घोषित करने, नीति जारी होते ही पात्र काश्तकारों की सूची वेबसाइट पर सार्वजनिक करने और पुराने कटे पट्टे बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वे खेत और बोवनी को लेकर सही निर्णय ले सकें।
मांग नहीं मानी तो नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव-
जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री बाहेती ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द नीति जारी नहीं की, पात्र किसानों की सूची सार्वजनिक नहीं की और किसानों की मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस अफीम काश्तकारों के साथ नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव करेगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो कांग्रेस किसानों के साथ आंदोलन को और व्यापक करेगी।