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नीमच। मद्य निषेध सप्ताह तथा 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आज महाविद्यालय के मुख्य सभागार में एक विशेष व्याख्यान एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और समाज सेवा के प्रति उनके दायित्वों को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता जीवन तिवारी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत मिश्रा, राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक डॉ. जे.सी. आर्य प्रो. यादवेन्द्र सिंह सोलंकी, प्राध्यापकों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं को व्यसनों से दूर रखें और अपने आस-पास के परिवेश को भी नशामुक्त बनाने के लिए 'सेवा संकल्प' लें। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जीवन तिवारी ने अपने व्याख्यान में मद्यपान और अन्य मादक पदार्थों के सेवन से युवाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने वैज्ञानिक आंकड़ों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार नशा न केवल एक व्यक्ति को, बल्कि उसके पूरे परिवार और राष्ट्र के भविष्य को अंधकार में धकेल देता है। उन्होंने मद्यनिषेध और सेवा संकल्प अभियान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा का उपयोग रचनात्मक कार्यों और समाज के उत्थान में होना चाहिए न कि व्यसनों में। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य महोदय द्वारा नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई और राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक डॉ. जे.सी. आर्य ने सभी का आभार माना। |
नीमच। मद्य निषेध सप्ताह तथा 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आज महाविद्यालय के मुख्य सभागार में एक विशेष व्याख्यान एवं शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और समाज सेवा के प्रति उनके दायित्वों को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता जीवन तिवारी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत मिश्रा, राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक डॉ. जे.सी. आर्य प्रो. यादवेन्द्र सिंह सोलंकी, प्राध्यापकों द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ।
महाविद्यालय के प्राचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं को व्यसनों से दूर रखें और अपने आस-पास के परिवेश को भी नशामुक्त बनाने के लिए 'सेवा संकल्प' लें। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जीवन तिवारी ने अपने व्याख्यान में मद्यपान और अन्य मादक पदार्थों के सेवन से युवाओं के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक जीवन पर पड़ने वाले विनाशकारी प्रभावों को रेखांकित किया।
उन्होंने वैज्ञानिक आंकड़ों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार नशा न केवल एक व्यक्ति को, बल्कि उसके पूरे परिवार और राष्ट्र के भविष्य को अंधकार में धकेल देता है। उन्होंने मद्यनिषेध और सेवा संकल्प अभियान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा का उपयोग रचनात्मक कार्यों और समाज के उत्थान में होना चाहिए न कि व्यसनों में। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य महोदय द्वारा नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई और राष्ट्रीय सेवा योजना के जिला संगठक डॉ. जे.सी. आर्य ने सभी का आभार माना।