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मनासा। जनपद पंचायत मनासा अंतर्गत ग्राम आतरीमाता स्थित प्रसिद्ध माता मंदिर क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। मकर संक्रांति पर लगता है भव्य मेला- आतरीमाता मंदिर में प्रतिवर्ष जनवरी माह में मकर संक्रांति के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन होता है। मेले में आसपास के गांवों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं। मेले के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहता है। मन्नत पूरी होने पर जीभ चढ़ाने की अनूठी मान्यता- मंदिर से जुड़ी एक विशेष मान्यता श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय रहती है। मान्यता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर कुछ भक्त अपनी जीभ चढ़ावे के रूप में अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जीभ सात दिनों के भीतर वापस आ जाती है। यह स्थानीय आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता है, जिसकी पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है। नवरात्रि में विशेष पूजा, दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त- नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। माता के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। करीब पांच शताब्दियों के इतिहास से जुड़ी मान्यता और मकर संक्रांति के भव्य मेले के कारण आतरीमाता मंदिर क्षेत्र की धार्मिक पहचान बना हुआ है। |
मनासा। जनपद पंचायत मनासा अंतर्गत ग्राम आतरीमाता स्थित प्रसिद्ध माता मंदिर क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। नवरात्रि के पावन पर्व पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं।
मकर संक्रांति पर लगता है भव्य मेला-
आतरीमाता मंदिर में प्रतिवर्ष जनवरी माह में मकर संक्रांति के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन होता है। मेले में आसपास के गांवों सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं। मेले के दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना रहता है।
मन्नत पूरी होने पर जीभ चढ़ाने की अनूठी मान्यता-
मंदिर से जुड़ी एक विशेष मान्यता श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय रहती है। मान्यता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होने पर कुछ भक्त अपनी जीभ चढ़ावे के रूप में अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि जीभ सात दिनों के भीतर वापस आ जाती है। यह स्थानीय आस्था और परंपरा से जुड़ी मान्यता है, जिसकी पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है।
नवरात्रि में विशेष पूजा, दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त-
नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। माता के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। करीब पांच शताब्दियों के इतिहास से जुड़ी मान्यता और मकर संक्रांति के भव्य मेले के कारण आतरीमाता मंदिर क्षेत्र की धार्मिक पहचान बना हुआ है।